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फिर इंद्र का आसन डोलने लगा

जब वृत्त अही ने जल बांधा गगन मे तब इंद्र का आसन डोलने लगा । किया दुर्वासा ने त्रिलोक श्रीहीन तब इन्द्र का आसन डोलने लगा । जब पहुंचाया विश्वामित्र ने सशरिर त्रिशंकु को तब इन्द्र का आसन डोलने लगा। चली मेघनाद की माया तब इन्द्र का आसन डोलने लगा। हुई अहिल्या पत्थर तब इन्द्र का आसन डोलने लगा। विश्वामित्र, शरद्वात, यवकृत इनका तप बढ़ा तब इन्द्र का आसन डोलने लगा। शिव का जमाता खुद इंद्र बना तब भी वह आसन डोलने लगा। गया पृथु सिंहासन पर तब इन्द्र का आसन डोलने लगा। 60000 मारे कपिल ने इंद्र के चाल में, मार्कण्डेय ने गिनी चीटिया इंद्र बनी जो काल में। कान्हा के गोवर्धन पर इंद्र का घमंड चकनाचूर हुआ, हनुमान को वज्र प्रहार तो पवन ने ललकार दिया। शुक्र राहु की बनी युति तो लंपट राजा बने यहां। तप का ताप बढ़ाओ पंडे तब ही योगी बने यहां। इंद्र है मन में सब के , मुक्त करे वो योगेश्वर। योग का अनुशासन , चले सिर्फ मेरे अंदर। न कोई जुड़ाव , न कोई बाधा ,योगी पूरा,  न होय आधा । योग का केवल्य, स्वर्ग से बड़ा , तभी हर योगी इंद्र से लड़ा। कहे कबीरा  इंद्र दा राज काग की विष्ठा, ना भोगा इंद्राणी नूँ। सुखदेव पास पुर...